Saturday, May 23, 2026

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“अजब मंडला की गजब जनपद पंचायत बिछिया: 181 शिकायतें बनी मजाक, बिना जांच बंद हो रहे प्रकरण”

“अजब मंडला की गजब जनपद पंचायत बिछिया: 181 शिकायतें बनी मजाक, बिना जांच बंद हो रहे प्रकरण”

मंडला जिले की जनपद पंचायत बिछिया एक बार फिर सवालों के घेरे में है। आम जनता की शिकायतों के त्वरित निराकरण के लिए शुरू की गई 181 मुख्यमंत्री हेल्पलाइन अब यहां मजाक बनती नजर आ रही है। आरोप है कि कई शिकायतों को बिना शिकायतकर्ता से संपर्क किए और बिना किसी ठोस कार्रवाई के सीधे बंद कर दिया जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने अपनी समस्याओं को लेकर 181 पर शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन न तो कोई अधिकारी मौके पर पहुंचा और न ही किसी प्रकार की जांच की गई। इसके बावजूद शिकायतों को “निराकृत” दिखाकर बंद कर दिया गया। इससे न केवल शासन की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं, बल्कि स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली भी संदेह के घेरे में आ गई है।
जनपद पंचायत बिछिया में इस तरह की कार्यशैली से लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। लोगों का आरोप है कि अधिकारी अपनी जिम्मेदारी निभाने के बजाय केवल कागजी खानापूर्ति कर रहे हैं, जिससे आम नागरिकों को न्याय नहीं मिल पा रहा।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब शिकायतों का सही तरीके से निराकरण ही नहीं हो रहा, तो आखिर इन शिकायतों को बंद करने की जिम्मेदारी किसकी है? क्या यह लापरवाही है या फिर जानबूझकर किया जा रहा कृत्य?
अब जरूरत है कि जिला प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कराए और दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करे, ताकि जनता का भरोसा शासन-प्रशासन पर बना रहे।

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“अजब मंडला की गजब जनपद पंचायत बिछिया: 181 शिकायतें बनी मजाक, बिना जांच बंद हो रहे प्रकरण”

मंडला जिले की जनपद पंचायत बिछिया एक बार फिर सवालों के घेरे में है। आम जनता की शिकायतों के त्वरित निराकरण के लिए शुरू की गई 181 मुख्यमंत्री हेल्पलाइन अब यहां मजाक बनती नजर आ रही है। आरोप है कि कई शिकायतों को बिना शिकायतकर्ता से संपर्क किए और बिना किसी ठोस कार्रवाई के सीधे बंद कर दिया जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने अपनी समस्याओं को लेकर 181 पर शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन न तो कोई अधिकारी मौके पर पहुंचा और न ही किसी प्रकार की जांच की गई। इसके बावजूद शिकायतों को “निराकृत” दिखाकर बंद कर दिया गया। इससे न केवल शासन की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं, बल्कि स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली भी संदेह के घेरे में आ गई है।
जनपद पंचायत बिछिया में इस तरह की कार्यशैली से लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। लोगों का आरोप है कि अधिकारी अपनी जिम्मेदारी निभाने के बजाय केवल कागजी खानापूर्ति कर रहे हैं, जिससे आम नागरिकों को न्याय नहीं मिल पा रहा।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब शिकायतों का सही तरीके से निराकरण ही नहीं हो रहा, तो आखिर इन शिकायतों को बंद करने की जिम्मेदारी किसकी है? क्या यह लापरवाही है या फिर जानबूझकर किया जा रहा कृत्य?
अब जरूरत है कि जिला प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कराए और दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करे, ताकि जनता का भरोसा शासन-प्रशासन पर बना रहे।

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