कान्हा में बाघों की संदिग्ध मौतों के विरोध में पत्रकारों का अनिश्चितकालीन धरना आठवें दिन भी जारी

Kanha Tiger Reserve में लगातार हो रही बाघों की संदिग्ध मौतों के विरोध में पत्रकारों का अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन मंगलवार को आठवें दिन भी जारी रहा। धरना स्थल पर पत्रकारों एवं वन्यजीव प्रेमियों द्वारा सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया गया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पांच बाघों की मौत के बाद भी कान्हा प्रबंधन गंभीरता नहीं दिखा रहा है, इसलिए उन्हें “जगाने” के उद्देश्य से धार्मिक अनुष्ठान भी किया जा रहा है।
पत्रकारों ने आरोप लगाया कि कान्हा प्रबंधन की लापरवाही, भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन के कारण लगातार बाघों की मौत हो रही है। प्रदर्शनकारियों ने “प्रबंधन हटाओ – बाघ बचाओ” के नारे लगाते हुए वन्यजीव संरक्षण के लिए ठोस कार्रवाई की मांग की।
गौरतलब है कि अप्रैल माह के अंतिम सप्ताह में एक बाघिन और उसके चार शावकों की मौत के बाद जिलेभर में आक्रोश का माहौल बना हुआ है। प्रदर्शन कर रहे पत्रकारों का आरोप है कि प्रबंधन अब तक मौतों का स्पष्ट कारण नहीं बता पाया है और अलग-अलग वजहें सामने रखकर मामले को टालने का प्रयास किया जा रहा है।
पत्रकारों ने 14 सूत्रीय मांगों को लेकर यह अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया है। उनकी मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए और वन्यजीव संरक्षण को लेकर प्रभावी कदम उठाए जाएं।
“कलम की ताकत कम पड़ी तो धरने पर उतरे पत्रकार”
धरना दे रहे पत्रकारों का कहना है कि मीडिया का कार्य प्रशासन और सरकार को सच्चाई से अवगत कराना होता है, लेकिन जब खबरों और लगातार उठाए गए मुद्दों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी नहीं जागे, तो उन्हें सड़क पर उतरकर आंदोलन करने के लिए मजबूर होना पड़ा।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह आंदोलन केवल पत्रकारों का नहीं, बल्कि वन्यजीव संरक्षण और जवाबदेही की लड़ाई है। उनका आरोप है कि जिला प्रशासन और संबंधित विभाग इस गंभीर मामले में उदासीन रवैया अपना रहे हैं, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण दोनों के लिए चिंताजनक है।



