रात में होती है पूजा, 25 फीट ऊंची ‘स्वर्ग की सीढ़ी’… चौगान मढ़िया का अनोखा रहस्य
खबर मंडला मध्यप्रदेश MP/CG
दिनांक 29/03/2026
मंडला। मध्यप्रदेश के मंडला जिले में आस्था, इतिहास और रहस्य का एक ऐसा संगम देखने को मिलता है जो न केवल चौंकाता है, बल्कि श्रद्धा से सिर झुकाने को मजबूर कर देता है। रामनगर के पास स्थित ‘चौगान मढ़िया’ एक ऐसा अद्भुत आदिवासी तीर्थ स्थल है, जहाँ परंपराएं दुनिया के अन्य मंदिरों से बिल्कुल अलग हैं।
रात 9 बजे के बाद जागती है श्रद्धा
आमतौर पर मंदिरों के पट सूर्यास्त के बाद बंद हो जाते हैं, लेकिन चौगान मढ़िया की कहानी अलग है। यहाँ मुख्य पूजा दिन में नहीं, बल्कि रात 9 बजे के बाद शुरू होती है। विशेषकर चैत्र नवरात्रि के दौरान यहाँ का माहौल पूरी तरह बदल जाता है। स्थानीय मान्यता है कि माँ दुर्गा रात्रि के समय यहाँ स्वयं जागृत होती हैं, इसीलिए भक्त देर रात यहाँ दीप जलाकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं।
25 फीट ऊंची ‘स्वर्ग की सीढ़ी’ का रहस्य
इस मढ़िया की सबसे बड़ी पहचान यहाँ स्थित ‘स्वर्ग की सीढ़ी’ है। लोहे और पत्थर से बनी करीब 25 फीट ऊंची इस सीढ़ी पर चढ़कर भक्त मन्नत का दीप जलाते हैं। दुर्गम होने के बावजूद, बूढ़े हों या जवान, हर कोई पूरी श्रद्धा के साथ इस सीढ़ी पर चढ़ता है। कहा जाता है कि जो भी सच्चे मन से यहाँ दीप प्रज्वलित करता है, उसकी हर मनोकामना माँ पूरी करती हैं।
17वीं शताब्दी का गौरवशाली इतिहास
चौगान मढ़िया का इतिहास 17वीं शताब्दी के गोंडवाना काल से जुड़ा है। जब गोंड राजा हिरदेशाह ने रामनगर को अपनी राजधानी बनाया था, तभी इस पवित्र मढ़िया की स्थापना की गई थी। आज भी यह स्थान आदिवासी संस्कृति और अटूट विश्वास का जीवंत प्रतीक बना हुआ है। घने जंगलों और प्राकृतिक सुंदरता के बीच स्थित यह शक्तिपीठ आध्यात्मिक शांति का अनुभव कराता है।
कठिन भक्ति: 5 किमी नंगे पैर और सिर पर जवारे
चैत्र नवरात्रि में यहाँ आस्था का सैलाब उमड़ता है। हजारों की संख्या में जवारे बोए जाते हैं, जिससे पूरा परिसर हरियाली में डूब जाता है। विसर्जन के दिन एक अद्भुत परंपरा देखने को मिलती है:
- भक्त तपती दुपहरी में सिर पर जवारे रखते हैं।
- लगभग 5 किलोमीटर का सफर नंगे पांव तय करते हैं।
- रामनगर स्थित नर्मदा घाट पर पहुँचकर जवारा विसर्जन किया जाता है।
बीमारियों से मिलती है राहत
यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं का दावा है कि माँ की कृपा से उन्हें गंभीर बीमारियों से राहत मिली है। यही कारण है कि यहाँ केवल मध्यप्रदेश ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी लोग दर्शन के लिए पहुँचते हैं।
”चौगान मढ़िया सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि सदियों पुरानी आस्था और विश्वास का वो प्रकाश है जो हर रात जलते दीपों के साथ और गहरा होता जाता है।”
कैसे पहुँचें?मंडला जिले के रामनगर से महज 5 किलोमीटर की दूरी पर चौगान गांव स्थित है। यहाँ पहुँचने के लिए मंडला मुख्यालय से बस या निजी वाहन आसानी से उपलब्ध हैं।
रिपोर्ट: प्रशांत तिवारी, मंडला




