95 लाख की सौगात आई, लेकिन CEO पर बरसी नाराज़गी—जनपद में विकास भी जारी, विवाद भी जारी

95 लाख की सौगात के बीच CEO पर उठे सवाल, जनप्रतिनिधि हुए मुखर
मंडला (मध्यप्रदेश):
मंडला जिले के बीजाडांडी जनपद पंचायत में इन दिनों एक दिलचस्प “डबल रोल” चल रहा है—एक तरफ विकास की गाड़ी तेज रफ्तार से दौड़ रही है, तो दूसरी तरफ उसी गाड़ी के ड्राइवर पर सवाल उठ रहे हैं।
कहानी कुछ यूं है कि शासन और मंत्री स्तर से बीजाडांडी जनपद पर मेहरबानी की बारिश हो रही है। जनजातीय बस्ती विकास योजना के तहत करीब 95.33 लाख रुपये के निर्माण कार्यों को हरी झंडी मिल चुकी है। सड़कों से लेकर पुलिया और अतिरिक्त कक्ष तक—कागजों पर विकास पूरी रफ्तार में है।

विकास आया, पर संतोष नहीं आया
जहां एक ओर सरकार कह रही है—“लो भई, विकास कर लो”,
वहीं जनप्रतिनिधि कह रहे हैं—“पहले सिस्टम तो ठीक कर लो!”
जनपद पंचायत अध्यक्ष सहित तमाम सदस्यों ने CEO बसंती दुबे के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ज्ञापन सौंपा गया, आरोप लगाए गए और साफ शब्दों में कहा गया—“ऐसे विकास से क्या फायदा, जिसमें तालमेल ही नहीं!”
शिकायतों का सिलसिला
जनप्रतिनिधियों का दावा है कि सरपंच, सचिव और ग्रामीण लगातार शिकायतों की पोटली लेकर घूम रहे हैं।
CEO पर सवाल, प्रशासन का जवाब
जनप्रतिनिधियों ने CEO को हटाने की मांग कर दी है और निष्पक्ष जांच की बात कही है।
वहीं प्रशासन ने भी क्लासिक जवाब दिया—
“ज्ञापन मिला है, जांच होगी, कार्रवाई भी होगी।”
अब ये “जांच” कब तक चलेगी और “कार्रवाई” कब तक आएगी—ये तो समय ही बताएगा।
बड़ा सवाल
जब ऊपर से पैसा, योजना और प्राथमिकता सब मिल रही है,
तो नीचे ये “विरोध की लहर” क्यों उठ रही है?
क्या विकास सिर्फ कागजों तक सीमित है?
या फिर “आपसी तालमेल” ने ही विकास की राह में ब्रेक लगा दिया है?
या मामला कुछ और ही है, जो अभी सामने नहीं आया?



