Friday, April 10, 2026

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“नलकूप पर भी ‘निजी हक’! जनसुनवाई पहुंची तो मोटर भी हुई रवाना

धौरगांव में शासकीय नलकूप से अतिक्रमण हटाते हुए प्रशासनिक टीम, मोटर पंप जप्ती की कार्रवाई करते अधिकारी और ग्रामीण मौजूद।
1️⃣ सरकारी नलकूप पर निजी कब्जा, जनसुनवाई के बाद कार्रवाई
2️⃣ धौरगांव में अतिक्रमण हटाया, मोटर पंप जप्त
3️⃣ जनसुनवाई की गूंज: शासकीय संपत्ति मुक्त
4️⃣ प्रशासन सख्त, नलकूप फिर हुआ सार्वजनिक
5️⃣ सरकारी पानी पर ‘निजी हक’ खत्म

खबर मंडला मध्यप्रदेश MP/CG

मंडला , 28 फरवरी 2026

ग्राम धौरगांव में शासकीय नलकूप ने शायद कभी सोचा भी नहीं होगा कि वह एक दिन “निजी संपत्ति” घोषित कर दिया जाएगा। मामला जनसुनवाई तक पहुंचा तो प्रशासन को याद आया कि नलकूप दरअसल जनता के लिए होता है, किसी एक के लिए नहीं।
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के नलकूप पर अतिक्रमण की शिकायत 24 फरवरी की जनसुनवाई में आई। शिकायत के बाद संयुक्त टीम 27 फरवरी को मौके पर पहुंची तो पाया गया कि नलकूप पर मोटर पंप लगाकर निजी उपयोग शुरू कर दिया गया था। यानी सरकारी पानी, लेकिन इस्तेमाल निजी!
संयुक्त टीम ने नियमों का सहारा लेते हुए मोटर पंप को हटाया, जप्त किया और नलकूप पर कैप लगाकर उसे “सरकारी” दर्जा फिर से दिलाया।
गांव में चर्चा है कि पानी तो सबका है, लेकिन कब्जा पहले आओ पहले पाओ वाला नहीं चलता। जनसुनवाई ने एक बार फिर साबित कर दिया कि सरकारी संपत्ति पर “अपना हक” जताने से पहले नियमों की किताब भी पढ़ लेनी चाहिए। 😉

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“नलकूप पर भी ‘निजी हक’! जनसुनवाई पहुंची तो मोटर भी हुई रवाना

धौरगांव में शासकीय नलकूप से अतिक्रमण हटाते हुए प्रशासनिक टीम, मोटर पंप जप्ती की कार्रवाई करते अधिकारी और ग्रामीण मौजूद।
1️⃣ सरकारी नलकूप पर निजी कब्जा, जनसुनवाई के बाद कार्रवाई
2️⃣ धौरगांव में अतिक्रमण हटाया, मोटर पंप जप्त
3️⃣ जनसुनवाई की गूंज: शासकीय संपत्ति मुक्त
4️⃣ प्रशासन सख्त, नलकूप फिर हुआ सार्वजनिक
5️⃣ सरकारी पानी पर ‘निजी हक’ खत्म

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मंडला , 28 फरवरी 2026

ग्राम धौरगांव में शासकीय नलकूप ने शायद कभी सोचा भी नहीं होगा कि वह एक दिन “निजी संपत्ति” घोषित कर दिया जाएगा। मामला जनसुनवाई तक पहुंचा तो प्रशासन को याद आया कि नलकूप दरअसल जनता के लिए होता है, किसी एक के लिए नहीं।
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के नलकूप पर अतिक्रमण की शिकायत 24 फरवरी की जनसुनवाई में आई। शिकायत के बाद संयुक्त टीम 27 फरवरी को मौके पर पहुंची तो पाया गया कि नलकूप पर मोटर पंप लगाकर निजी उपयोग शुरू कर दिया गया था। यानी सरकारी पानी, लेकिन इस्तेमाल निजी!
संयुक्त टीम ने नियमों का सहारा लेते हुए मोटर पंप को हटाया, जप्त किया और नलकूप पर कैप लगाकर उसे “सरकारी” दर्जा फिर से दिलाया।
गांव में चर्चा है कि पानी तो सबका है, लेकिन कब्जा पहले आओ पहले पाओ वाला नहीं चलता। जनसुनवाई ने एक बार फिर साबित कर दिया कि सरकारी संपत्ति पर “अपना हक” जताने से पहले नियमों की किताब भी पढ़ लेनी चाहिए। 😉

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