Saturday, April 11, 2026

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दुग्ध उत्पादन होगा दोगुना: मंडला के 73 गांवों में ‘क्षीरधारा ग्राम योजना’ का सर्वे शुरू

दिनांक 27-02-2026

खबर मंडला मध्यप्रदेश MP/CG

प्रदेश में श्वेत क्रांति को नई दिशा देने के उद्देश्य से डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मंडला जिले में ‘क्षीरधारा ग्राम योजना’ को धरातल पर उतारने की तैयारी शुरू हो गई है। पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा इस महत्वाकांक्षी योजना के माध्यम से दुग्ध उत्पादन को दोगुना करने और पशुपालकों की आय बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।

इस संबंध में कलेक्टर सोमेश मिश्रा ने जिला योजना भवन में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की। बैठक में उन्नत नस्ल के पशुओं को बढ़ावा देने, बेहतर पशु चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने, नियमित टीकाकरण सुनिश्चित करने तथा उच्च गुणवत्ता वाले चारे और आहार की व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की गई।

इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता इसका कोलेबोरेटिव मॉडल है। योजना को सफल बनाने के लिए वन विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग तथा पशुपालन एवं डेयरी विभाग मिलकर कार्य करेंगे। विभागों के इस समन्वय से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने और पशुपालन को एक स्थायी व्यवसाय के रूप में विकसित करने की उम्मीद जताई जा रही है।

प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश शासन के निर्देशों के बाद जिले के 73 गांवों को प्रथम चरण के लिए चयनित किया गया है। 25 फरवरी से इन गांवों में आधारभूत सर्वे का कार्य शुरू हो चुका है। यह सर्वे रिपोर्ट आगे की कार्ययोजना का आधार बनेगी।

प्रशासन का लक्ष्य केवल दुग्ध उत्पादन बढ़ाना ही नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक समृद्धि लाना भी है।

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दुग्ध उत्पादन होगा दोगुना: मंडला के 73 गांवों में ‘क्षीरधारा ग्राम योजना’ का सर्वे शुरू

दिनांक 27-02-2026

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प्रदेश में श्वेत क्रांति को नई दिशा देने के उद्देश्य से डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मंडला जिले में ‘क्षीरधारा ग्राम योजना’ को धरातल पर उतारने की तैयारी शुरू हो गई है। पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा इस महत्वाकांक्षी योजना के माध्यम से दुग्ध उत्पादन को दोगुना करने और पशुपालकों की आय बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।

इस संबंध में कलेक्टर सोमेश मिश्रा ने जिला योजना भवन में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की। बैठक में उन्नत नस्ल के पशुओं को बढ़ावा देने, बेहतर पशु चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने, नियमित टीकाकरण सुनिश्चित करने तथा उच्च गुणवत्ता वाले चारे और आहार की व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की गई।

इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता इसका कोलेबोरेटिव मॉडल है। योजना को सफल बनाने के लिए वन विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग तथा पशुपालन एवं डेयरी विभाग मिलकर कार्य करेंगे। विभागों के इस समन्वय से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने और पशुपालन को एक स्थायी व्यवसाय के रूप में विकसित करने की उम्मीद जताई जा रही है।

प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश शासन के निर्देशों के बाद जिले के 73 गांवों को प्रथम चरण के लिए चयनित किया गया है। 25 फरवरी से इन गांवों में आधारभूत सर्वे का कार्य शुरू हो चुका है। यह सर्वे रिपोर्ट आगे की कार्ययोजना का आधार बनेगी।

प्रशासन का लक्ष्य केवल दुग्ध उत्पादन बढ़ाना ही नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक समृद्धि लाना भी है।

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