ग्राम पंचायत ककैया में तानाशाही: अंबेडकर जयंती पर नहीं खुला पंचायत भवन, गेट पर ही पूजन करने को मजबूर हुए ग्रामीण
खबर मंडला मध्यप्रदेश MP/CG
संवाददाता: प्रशांत तिवारी
ग्रामीणों ने 2 घंटे तक किया पंचायत खुलने का इंतजार।
सरपंच उपसरपंच और सचिव की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल।
विवादों और भ्रष्टाचार के आरोपों से पुराना नाता है इस पंचायत का।
मंडला। जिले की ग्राम पंचायत ककैया एक बार फिर अपनी कार्यप्रणाली और जनप्रतिनिधियों की कथित तानाशाही को लेकर सुर्खियों में है। अवसर था संविधान निर्माता बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती का, लेकिन ग्राम पंचायत प्रशासन की लापरवाही के चलते ग्रामीणों को भारी निराशा का सामना करना पड़ा।
गेट पर मनाई गई जयंती:
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्रामीण अंबेडकर जयंती मनाने के लिए पंचायत भवन पहुँचे थे, लेकिन काफी समय तक भवन का ताला नहीं खुला। ग्रामीणों ने कड़ी धूप में लगभग 2 घंटे तक सरपंच, सचिव और उपसरपंच के आने का इंतजार किया। जब दोपहर 1:30 बजे तक कोई जिम्मेदार अधिकारी या जनप्रतिनिधि नहीं पहुँचा, तो आक्रोशित ग्रामीणों ने पंचायत भवन के गेट के बाहर ही बाबा साहब के चित्र पर पूजन-अर्चन कर जयंती मनाई।
तानाशाही के आरोप:
ग्रामीणों का स्पष्ट तौर पर कहना है कि यह सरपंच पति, उपसरपंच और सचिव की मिलीभगत और तानाशाही का नतीजा है। राष्ट्रीय पर्व और महापुरुषों की जयंती पर भी शासकीय संस्थान का बंद रहना प्रशासनिक उदासीनता की पराकाष्ठा है।
विवादों से पुराना नाता:
गौरतलब है कि ग्राम पंचायत ककैया पूर्व में भी सरपंच और उपसरपंच के आपसी विवादों के कारण चर्चा में रही है। हाल ही में सरपंच पति पर मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के नाम पर रिश्वतखोरी के प्रयास के आरोप लगे थे। सोशल मीडिया पर मामला वायरल होने के बाद सरपंच पति ने सफाई देते हुए रिश्तों की दुहाई दी थी, लेकिन आज की घटना ने एक बार फिर पंचायत के कामकाज पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग:
इस घटना के बाद ग्रामीणों में भारी रोष है। अब देखना यह होगा कि जनपद और जिला प्रशासन इस मामले में दोषी सरपंच , सचिव और लापरवाह जनप्रतिनिधियों पर क्या कार्रवाई करता है।



